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The Term "Bhagwat and Bhagavatam " - Meaning and Contexts.भगवत्" (संस्कृत: भगवत्) भागवतम् शब्द का अर्थ।

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The Term " Bhagwat " - Meaning and Contexts The term "Bhagwat" (also spelled Bhagavata , Bhagwat, or Bhagavatha ) is derived from the Sanskrit word " Bhagavat " (भगवत्). भगवत्कथाश्रवणस्य महिमा (तीर्थातीतं भगवत्स्मरणम्) अहं अज्ञानी मनसि आशां बिभ्र्याम्। सर्वानि तीर्थानि भ्रमणेन द्रक्ष्यामि। परन्तु भगवत्कृपया श्रवणे ज्ञातवान्, केवलं भगवत्कथाश्रवणमननचिन्तन। सर्वतत्त्वतीर्थपुण्यज्ञानं विद्यमानम्। एष अज्ञानिभक्तेभ्यः ददाति ऊर्ध्वमार्गं। एष सनातनधर्मस्य सनातनमतम्॥ 💓 1. Literal Meaning: Bhagavat (भगवत्) means “divine”, “of the Bhagavān (God)”, or “belonging to God.” Bhagwat is the vernacular (e.g., Hindi ) form of the same term. Thus, Bhagwat generally denotes “that which pertains to Bhagavān,” especially in reference to Lord Vishnu or Lord Krishna in devotional contexts. 2.  Bhagavatam = That which pertains to Bhagavan भागवतम् = भगवतः सम्बन्धी ग्रन्थः, भगवद्विषयकं शास्त्रम्। Common Usages: a) Bhagavata Purana ( Shrimad Bhagavatam ): One of the eighteen maj...

जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय अवस्था:स्वप्न, ध्यान और योग।

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जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति भारतीय वेदांत दर्शन में चेतना के तीन प्रमुख अवस्थाएँ मानी जाती हैं। इन्हें "अवस्था त्रय" कहा जाता है। अद्वैत वेदांत और मंडूक्य उपनिषद में इनका विशेष रूप से वर्णन किया गया है। जाग्रत, स्वप्न,  सुषुप्ति और तुरीय अवस्था: स्वप्न-अनुभूति-विवेचनम् शृणुत भक्तगणाः एतद् सनातन वचनम्। स्वप्नः अनुभूतिश्च द्वयं अनिश्चितदर्शनम्।। अप्रामाणिके भवति द्वयं महाविध्वंसकम्॥ प्रामाणिके भवति द्वयं परमसुखप्रदम्॥ 1. जाग्रत अवस्था (Wakeful State) यह वह अवस्था है जिसमें हम बाह्य जगत का अनुभव करते हैं। जाग्रत अवस्था में जीव स्वयं को स्थूल शरीर से पहचानता है तथा बाह्य इन्द्रियों के माध्यम से स्थूल वस्तुओं का अनुभव करता है। इस अवस्था में जीव को विश्व कहा जाता है। इस अवस्था में हमारी इंद्रियाँ सक्रिय रहती हैं और मन बाहरी वस्तुओं से जुड़ा रहता है। इस अवस्था में व्यक्ति कर्म करता है और उनके फल भोगता है। 2. स्वप्न अवस्था (Dream State) इस अवस्था में बुद्धि जाग्रत अवस्था से प्राप्त वासनाओं (संस्कारों) के साथ कर्ता की भूमिका ग्रहण करके सक्रिय होती है। इस अवस्था में इन्द्रियाँ निष्क्रिय...

ईश्वर प्राप्ति का उपाय, ईश्वर - ईश्वर प्राप्ति के लक्षण।

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ईश्वर प्राप्ति का उपाय। जैसे एक पक्षी अपने पंखों के सहारे एक स्थान से दूसरे स्थान तक उड़ता है, वैसे ही जीव कर्म और धर्म, इन दो पंखों के सहारे जीवन-पथ पर आगे बढ़ता है। जैसे पक्षी अपने अर्जित ज्ञान और दृढ़ विश्वास के बल पर अपने प्रिय गंतव्य तक पहुँचता है, वैसे ही जीव निष्काम कर्म, निष्काम धर्म और ज्ञानयोग से प्राप्त ज्ञान तथा दृढ़ विश्वास के द्वारा, भक्ति और प्रेम के सहारे अपने परम प्रिय गंतव्य,ईश्वर के धाम तक पहुँचता है।  ईश्वर प्राप्ति के लक्षण। ईश्वर प्राप्ति (ईश्वरप्राप्ति) के कुछ सामान्य लक्षण होते हैं, जो विभिन्न धर्मों और आध्यात्मिक मार्गों के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। हालांकि, कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं। 1.भगवान का नाम लेते ही आँखों से आँसू छलक पड़ते हैं, आवाज भर आती है, और शरीर भक्ति के आनंद से पुलकित हो उठता है।   2.अहंकार समाप्त हो जाएगा। अखंड शांति और आनंद की अनुभूति होगी। 3.असीम प्रेम और करुणा का अनुभव होगा। भगवान की शरण में मनन और चिंतन करने से अश्रु बहने लगेंगे। 4. भगवान का मनन और चिंतन प्रबल होगा, फलस्वरूप अन्यमनस्कता आएगी। सांसारिक आसक्तियों (माया-मोह) से म...

What Happens After Death? What is the Soul (Atman)?

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This body, the gross one, is fashioned from the five great elements . Mind and intellect, the five vital airs, and the five organs of knowledge ,United with the five organs of action  together form the subtle body . This subtle body is verily the eternal abode of the eternal soul , The self-luminous and independent one. An enlightened being or self-aware person  does not fear death because they know  that death is not the end of life ,  but rather a new phase and a fresh  beginning in the soul's journey . 🔯 What is the Soul ( Atman )? What is the Supreme Soul ( Paramatman )? The Soul (Atman): The soul is generally referred to as an invisible entity that resides independently within the  body.  “This soul is neither born nor does it ever die, nor having once existed, does it cease to be. This soul is birthless, eternal, imperishable, and timeless. Even when the body is destroyed, the soul is not destroyed.” The Supreme Soul (Paramatman): The term Para...